SDM Success Story: जुड़वा बहनों ने साथ में क्रेक किया PCS, आज बन गई SDM

युक्ता मिश्र और मुक्ता मिश्र दोनों जुड़वा बहनें है दोनें ने एक साथ ही पीसीएस की तैयारी की थी और आज दोनों बहनें एसडीएम है। दोनों बहनों ने एक साथ ही ग्रेजुएशन पास किया और पोस्टल असिसटेंट पद के लिए परिक्षा भी दी। 
 
TWIN SISTERS

Newz Fast, Success Story: युक्ता मिश्र और मुक्ता मिश्र का जन्म उतराखंड के नैनीताल में हुआ था। आज ये दोनों बहनें सभी के लिए चर्चा का विषय बनी हुई है। दोनों बहनें अपनी मेहनत और लगन से हर कहीं सफलता हासिल कर रही है । 

दोनों बहनों ने मिलकर अपने माता और पिता का नाम रोशन किया है। दोनों में हमेशा एक साथ पड़ती थी और दोनों बहनें एक साथ ही पीसीएस की परिक्षा भी दी। 

सबसे ज्यादा हैरानी की बात ये है कि दोनों ही इसमें पास हो गई और दोनों का सिलेक्शन अलग-अलग जगह हुआ है। युक्ता मिश्र और मुक्ता मिश्र का जन्म चमोली निवासी हेमा मिश्र और केडी मिश्रा के घर पर हुआ था। 

इन जुड़वा बहनों की पढ़ाई गोपेश्वर, बरेली और सहारनपुर में हुई थी। दोनों बचपन से ही पढ़ाई में काफी होशियार थीं और अपने लक्ष्य के प्रति अडिग भी। 

उन्होंने बरेली कॉलेज से ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की थी। युक्ता मिश्र और मुक्ता मिश्र ने ग्रेजुएशन के दौरान ही पोस्टल असिस्टेंट पद के लिए परीक्षा दी थी।

कमाल की बात है कि दोनों ही बहनें इसमें सफल हो गई थीं। फिर दोनों अल्मोड़ा के डाकघर में सरकारी नौकरी करने लगी थीं। इसके साथ ही अल्मोड़ा के सोबन सिंह जीना कैंपस में प्राइवेट स्टूडेंट के तौर पर एडमिशन लेकर आगे की पढ़ाई भी करती रहीं।

उत्तराखंड PCS में किया था टॉप

2014 में उत्तराखंड पीसीएस परीक्षा के परिणाम घोषित होने के बाद दोनों बहनें चर्चा में आ गई थीं। उस समय युक्ता हल्द्वानी आरटीओ ऑफिस में बतौर परिवहन कर अधिकारी नियुक्त थीं। 

महिला वर्ग में मुक्ता ने प्रदेश में पहला और युक्ता ने दूसरा स्थान हासिल किया था। ओवरऑल युक्ता मिश्र ने पीसीएस में सातवीं और मुक्ता ने चौथी रैंक हासिल कर सबको हैरान कर दिया था।

SDM के पद पर तैनात हैं जुड़वा बहनें

फिलहाल युक्ता मिश्र डोईवाला की SDM हैं और मुक्ता मिश्र कोटद्वार की। रुद्रप्रयाग में एसडीएम सदर के पद पर तैनात रहने के दौरान मुक्ता मिश्र युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की फ्री कोचिंग देती थीं। 

2018 में उन्होंने राजकीय इंटर कॉलेज रुद्रप्रयाग में सुबह आठ से दस बजे तक नियमित कोचिंग क्लासेस चलाई थीं।