IAS : विकलांग होकर भी नही मानी हार, मेहनत से बने IAS Officer

Ramesh एक बहुत ही गरीब परिवार से सबंध रखते है। रमेश एक विकलांग है। रमेश जब 12वीं कक्षा में थे तब रमेश ने 88।5% Marks स्कोर किए। रमेश IAS बनने से  पहले अपने गांव में एक टीचर की  नौकरी करते थे। 
 
IAS RAMESH GHOLAP

Newz Fast, Success Story: कहते है सफलता को अगर शिद्दत से पाने की कोशिश करो तो उसे हासिल करने से कोई आपको नही रोक पाता। लेकिन जब तक खुद से हम हिम्मत नही करते है तब तक सफलता को भी हासिल नही कर सकते। 

आज की कहानी है रमेश घोपाल के बारे में जो की एक विकलांग है। रमेश के पिता एक शराबी थे। दिन रात शराब पीने के कारण रमेश का परिवार सड़क पर आने को मजबूर  हो गया था। 

इसलिए रमेश की मां ने कमाना शुरू किया रमेश अपनी मां के साथ बीच सड़क पर चूड़िया बेचा करते थे और रमेश अपनी मेहनत की वजह से एक आईएएस ऑफिसर है। 

रमेश के पिता के शराब पीने की वजह  से मां सड़कों पर चूड़ियां बेचने लगीं, रमेश के बाएं पैर में पोलियो हो गया था, लेकिन हालात ऐसे थे कि रमेश को भी मां और भाई के साथ चूड़ियां बेचनी पड़ी।

गांव में पढाई पूरी करने के बाद बड़े स्कूल में दाखिला लेने के लिए रमेश को अपने चाचा के गांव बरसी जाना पड़ा। साल 2005 में रमेश 12 वीं कक्षा में थे तब उनके पिता का निधन हो गया।

चाचा के गांव से अपने घर जाने में बस से 7 रुपये लगते थे लेकिन विकलांग होने की वजह से रमेश का केवल 2 रुपये किराया लगता था लेकिन वक्त की मार तो देखो रमेश के पास उस समय 2 रुपये भी नहीं थे।

पड़ोसियों की मदद से किसी तरह रमेश अपने घर पहुंचे। रमेश ने 12वीं में 88।5 फीसदी नंबर के साथ परीक्षा पास की। इसके बाद इन्होंने एजुकेशन में एक डिप्लोमा कर लिया और गांव के ही एक स्कूल में टीचर बन गए।

डिप्लोमा करने के साथ ही रमेश ने बीए की डिग्री भी ली। टीचर बनकर रमेश अपने परिवार का खर्च चला रहे थे, लेकिन उनका टारगेट कुछ और ही था।

आखिर 2012 में रमेश की मेहनत रंग लाई और रमेश ने यूपीएससी की परीक्षा में 287 वीं रैंक हासिल की। इस तरह बिना किसी कोचिंग का सहारा लिए, अनपढ़ मां बाप का बेटा आईएएस (IAS) अफसर बन गया।

रमेश ने अपने गांव वालों से कसम ली थी कि जब तक वो एक बड़े अफसर नहीं बन जाते तब तक गांव वालों को अपनी शक्ल नहीं दिखाएंगे।